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झारखंड


जांच को आंच: दागी अफसर खुद कर रहे है अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच

वन विभाग में ज्यादातर जांच ठंढे बस्ते में, दागी अफसर बिना कार्रवाई हो रहे रिटायर
जांच को आंच: दागी अफसर खुद कर रहे है अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच

न्यूज11 भारत


रांची: लॉकडाउन के दौरान अनगड़ा के जंगल में करोड़ों के पेड़ काटे गए. वर्षों पुराने दर्जनों पेड़ों को किसने काटा? कटे हुए पेड़ों का क्या हुआ? पेड़ कटाई के लिए कौन दोषी है? पेड़ कट रहे थे, तब वन विभाग क्या कर रहा था? इन तमाम सवालों का जवाब जब वन विभाग के अफसर नहीं दे सके, तब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेड़ कटाई की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो(ACB) से कराने का आदेश दिया. अब पेड़ कटाई या कहे पेड़ घोटाले..इसकी जांच वन विभाग के अफसर नहीं, बल्कि एसीबी करेगी. पेड़ कटाई मामले में वन विभाग के कई अफसर व कर्मी फंसेंगे. अगर पेड़ कटाई की जांच वन विभाग के अफसर करते, तो विभाग का कोई भी नहीं फंसता. क्योंकि वन विभाग में जांच वही करता है, जो उस गड़बड़ी में शामिल होता है. 


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वन विभाग में गड़बड़ी करने वाला खुद जांच करेगा, तो वह अपने खिलाफ क्या लिखेगा. इसलिए वन विभाग में ज्यादातर अनियमितता, गड़बड़ी आदि के मामलों की लीपा-पोती हो जाती है. कागजी खानापूर्ति कर घोटाले, वित्तीय अनियमिता जैसे गंभीर मामलों को ठंढे बस्ते में डाल दिया जाता है. वर्तमान में वन विभाग ने जिन आरएफओ को जांच सौंपी है, उनसे सात बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट समर्पित करने को कहा है. इनमें श्रमिकों का भुगतान, उनके मास्टर रोल का सत्यापन, सामग्री का क्रय हुआ या नहीं, क्रय की प्रक्रिया, भुगतान, जमीन पर योजनाएं उतरी या नहीं, अद्यतन कार्य की क्या स्थिति है, आदि शामिल हैं. जांच पूरी नहीं होने की वजह से वन विभाग के कई दागी अफसर बिना कार्रवाई के ही सेवानिवृत होकर, सरकार से मिलने वाली सारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं. 

गड़बड़ी संबंधित जांच के दायरे में 100 मामले:


वन विभाग में अभी 35 ऐसे मामलों की जांच चल रही है, जिसकी जांच पदाधिकारी खुद आरोपी हैं. विभाग के पास कोई इंजीनियरिंग विंग नहीं है. ऐसे में रेंजर, फॉरेस्टर खुद अपनी देखरेख में निर्माण कार्य कराते है. इतना ही नहीं, भुगतान भी खुद करते है. यहां देखने वाला कोई नहीं होता कि काम कैसा हुआ है? भुगतान कितना किया जा रहा है? जो अफसर निर्माण कराता है, वहीं देखता है, वहीं भुगतान भी करता है. ऐसे में अनियमितता की संभावना बनी रहती है. यह वन विभाग के जिम्मेवार भी मानते हैं. मगर सबकुछ जानते हुए भी खामोश रहते हैं. राज्यभर में वित्तीय अनियमितता, निर्माण में घोटाला, पौधारोपण में गड़बड़ी आदि से संबंधित 100 से ज्यादा मामले जांच के दायरे में हैं.  ऐसे मामलों में वन अफसर, जो खुद गड़बड़ी में शामिल है, वह मामले की कितनी सच्चाई से जांच करेंगे, यह समझा जा सकता है. 


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250 करोड़ के निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत

वन विभाग के रांची, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, सरायकेला और चतरा प्रमंडल में करोड़ों का निर्माण कार्य पिछले तीन वर्षों में हुआ है. वर्ष 2017 से 2019 के बीच करीब 250 करोड़ का निर्माण कार्य कराया गया है. इसमें से ज्यादातर निर्माण कार्यों में गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिली है. मुख्यालय ने जांच की जिम्मेवारी डिविजनल फॉरेस्ट अफसर ( डीएफओ) को सौंपी है. मजेदार बात यह है कि डीएफओ की देखरेख में ही सारा काम हुआ. उनके निर्देश पर आरएफओ और वनपाल ने काम कराया. ऐसे में डीएफओ जांच में कितनी ईमानदारी बरतेंगे. जांच पर आंच की बात विभागीय मुख्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ है. जिम्मेवार भी जानते है कि दोषी पदाधिकारी किसी जांच में शतप्रतिशत इमानदारी नहीं बरतेंगे. इसके बाद भी दागी अफसरों को वन विभाग में जांच का जिम्मा सौंपा जा रहा है. 


दागी अफसर खुद जांच कर रहे कई मामले


पौधरोपण में गड़बड़ी:  वन विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 में रिंग रोड के दोनों किनारे 10 किलोमीटर के दायरे में पौधरोपण किया गया था. इसमें करोड़ों रुपये खर्च हुए थे. लेकिन स्थिति यह है कि 10 फीसदी पौधे भी नहीं बचे हैं. विभागीय लापरवाही की वजह से पौधरोपण में भारी अनियमितता की शिकायत मिली. इसकी जांच वही अफसर कर रहे है, जिनकी देखरेख में पौधरोपण का कार्य हुआ है.


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गैबियन लगाने में अनियमितता: लातेहार सामाजिक वानिकी प्रक्षेत्र में बांस का गैबियन लगाने में करीब 75 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया. शिकायत मिलने के बाद वन विभाग में लातेहार के उन्हीं अफसरों को जांच का जिम्मा सौंपा, जिनकी देखरेख में गैबियन लगाने काम हुआ था.

करोड़ों का वित्तीय घोटाला: जामताड़ा वन प्रमंडल में गत वर्ष तीन करोड़ की वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिली. जिन अफसरों ने कुंआ, तालाब और पौधरोपण पर राशि खर्च की थी, विभाग ने उन्हीं अफसरों से पूरे मामले में जांच रिपोर्ट तलब की है.


वन विभाग में महत्वपूर्ण मामले, जिनकी चल रही है जांच



  • हजारीबाग नेशनल पार्क: मनरेगा के तहत 10 किलोमीटर में बांस गैबियन लगाना था, एक भी नहीं लगा. 50 लाख रुपये की अनियमितता.

  • हजारीबाग वन्य प्राणी प्रमंडल: मिट्टी खरीद के नाम पर 50 लाख रुपये का गबन.

  • गुमला वन प्रमंडल: पौधारोपण के नाम पर 3 करोड़ रुपये राशि की निकासी.

  • साहिबगंज वन प्रमंडल: 50 लाख पौधे लगाने के नाम पर 50 लाख रुपये का गबन.

  • बोकारो वन प्रमंडल: पौधारोपण के नाम पर 50 लाख रुपये का गबन.

  • पाटन वन क्षेत्र: पौधारोपण में चार लाख रुपये की अनियमितता.

  • डालटनगंज वनरोपण प्रमंडल: सड़क के किनारे पौधारोपण के नाम पर 10 लाख रुपये की हेराफेरी.

  • थर्ड और फोर्थ ग्रेड कर्मियों की कॉलोनी में पहुंच पथ निर्माण में अनियमितता.

  • पीसीसीएफ कार्यालय भवन के जीर्णोद्धार में अनियमितता.

  • सीडा भवन के जीर्णोद्धार में अनियमितता.

  • कर्मचारी आवासीय कॉलोनी में गोदाम निर्माण में अनियमितता.

  • वरीय वन पदाधिकारियों की कॉलोनी में सड़क निर्माण में अनियमितता.

  • वरीय वन पदाधिकारियों की कॉलोनी में नाली निर्माण में अनियमितता.

  • वरीय वन पदाधिकारियों की कॉलोनी में पहुंच पथ निर्माण में अनियमितता.


 

 

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