जल दिवस जो याद दिलाती है एक अमर प्रेम की

जल दिवस जो याद दिलाती है एक अमर प्रेम की

कहानी है ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर कि जो नलकेश्वर के जंगल में शिकार के लिए जाता था वह उसने एक दिन एक युवती (गुजरी) को देखा और देखते ही राजा उसपर मोहित हो गया, राजा ने युवती से शादी कि बात कि तो युवती ने भी इस पर एक शर्त रख दी, शर्त यह थी के युवती नलकेश्वर स्थित गोमुख से निकला पानी ही पीती है इसलिए यह पानी किले तक ले जाया जाए। राजा ने वह पानी किले तक ले जाने के लिए 50 किमी लंबी पानी की लाइन बनवाई, जिसके अवशेष आज भी नलकेश्वर में दिखाई देते हैं।
गांवों वालों के मुताबिक नलकेश्वर और ग्वालियर का किला राजा मानसिंह तोमर और गूजरी (मृगनयनी) के अटूट प्रेम का गवाह है। और टूटे हुए पाइप के शेष दोनों के प्यार कि निशानी भी है.


जल दिवस कि शुरुआत

'विश्व जल दिवस' मनाने की कवायद संयुक्त राष्ट्र ने साल 22 मार्च 1992 के अधिवेशन में हुई थी। 'विश्व जल दिवस' की अंतरराष्ट्रीय पहल 'रियो डि जेनेरियो' में 1992 में आयोजित 'पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' (यूएनसीईडी) में की गई थी, जिस पर सर्वप्रथम 1993 को पहली बार 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में 'जल दिवस' के मौके पर जल के संरक्षण और रख-रखाव पर जागरुकता फैलाने का कार्य किया गया।

विश्व जल दिवस क्यों बनाया जाता है.

यह अभियान का उद्देश्य विश्व के सभी विकसित देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है साथ ही यह जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करता है।

साफ़ पानी कि कमी.

कहने को तो हमारी पृथ्वी पर एक अरब 40 घन किलो लीटर पानी है। इसमें से 97.5 प्रतिशत पानी समुद्र में है, जो खारा है, शेष 1.5 प्रतिशत पानी बर्फ़ के रूप में ध्रुव प्रदेशों में है। इसमें से बचा एक प्रतिशत पानी नदी, सरोवर, कुओं, झरनों और झीलों में है जो पीने के लायक है। इस एक प्रतिशत पानी का 60 वाँ हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों में खपत होता है। बाकी का 40 वाँ हिस्सा हम पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़े धोने एवं साफ़-सफ़ाई में खर्च करते हैं।

नोट: सुरक्षित पेयजल से दुनिया की करीब 2.1 अरब आबादी महरूम है। दुनियाभर में हर साल 3.4 लाख बच्चों (5 साल से कम उम्र के) की मौत डायरिया से हो जाती है। दुनिया में हर 10 में से 4 लोग पानी की कमी से प्रभावित हैं।


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