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पेट्रोल-डीजल के भाव आसमान छू रहे हैं, आम आदमी से लेकर ट्रांसपोर्टर्स तक सभी बेहाल

जीएसटी में शामिल करने की मांग
पेट्रोल-डीजल के भाव आसमान छू रहे हैं, आम आदमी से लेकर ट्रांसपोर्टर्स तक सभी बेहाल

पेट्रोल-डीजल के भाव आसमान छू रहे हैं. दिल्ली में पेट्रोल का रेट 86 रुपये लीटर के पार हो गया है. कई शहरों में तो पेट्रोल 90 रुपये पार हो गया है. करीब 29 रुपये की लागत वाला पेट्रोल इतना महंगा बिक रहा तो इसकी वजह यह है कि करीब 53 रुपये जनता टैक्स के रूप में ही दे रही है.


अब लोगों को उम्मीद है कि वित्त मंत्री बजट में ऐसा कुछ ऐलान करेंगी, जिससे आम जनता को कुछ राहत मिले. तेल के दाम देश में रिकॉर्ड ऊंचाई पर चल रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान तेल की मांग काफी कम हो गई  थी. लेकिन सरकार ने टैक्सेज बढ़ाकर पेट्रोलियम से अपने राजस्व को और बढ़ाने का कमाल कर लिया.कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट आ गई थी, इसका फायदा भी तेल कंपनियों को मिला.


पेट्रोलियम पर सबसे ज्यादा टैक्स लगाने के मामले में भारत दुनिया के टॉप 5 देशों में से है. पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कलेक्शन में इस वित्त वर्ष में जबरदस्त बढ़त हुई है. अप्रैल से नवंबर 2020 तक सरकार का एक्साइज ड्यूटी कलेक्शन बढ़कर 1,96,342 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. जबकि इसके एक साल पहले की अवध‍ि में यह 1,32,899 करोड़ रुपये ही था. यह संग्रह इस बात के बावजूद है कि इन आठ महीनों के दौरान 1 करोड़ टन कम डीजल की बिक्री हुई. इस दौरान सिर्फ 4.49 करोड़ टन डीजल की बिक्री हुई. सरकार ने लॉकडाउन के दौरान ही पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 13 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 16 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी थी.


पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से आम आदमी से लेकर ट्रांसपोर्टर्स तक सभी बेहाल हैं. कोरोना के दौरान सैलरी में कटौती, काम-धंधा मंदा पड़ने से आम आदमी पहले से काफी परेशान है, अब जब वह काम पर लौट रहा है तो उसे महंगे पेट्रोल की मार सहनी पड़ रही है. गौरतलब है कि ट्रांसपोर्टर्स पहले से ही काफी परेशान हैं. टोल टैक्सेज काफी बढ़ गए हैं. कोरोना की वजह से उनका कारोबार महीनों तक ठप रहा. पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से से माल भाड़ा भी बढ़ता जा रहा है. ट्रांसपोर्टर्स की लागत का करीब 55 फीसदी हिस्सा ईंधन का ही होता है.  ट्रांसपोर्टर और कई एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटानी चाहिए ताकि इन ईंधन के आसमान छूते दाम कम हों. इससे मंदी और और कोरोना की वजह से परेशान लोगों को राहत मिलेगी.


पेट्रोल-डीजल को लेकर एक बड़ी मांग यह की जाती है कि इन्हें जीएसटी के दायरे में लाया जाए. अगर ऐसा हुआ तो पेट्रोल-डीजल के दाम में भारी गिरावट आ सकती है. इसकी वजह यह है क‍ि जीएसटी की अध‍िकतम दर 28 फीसदी है. अभी पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारें वैट लगाती हैं. वहीं, कई जगहों पर ट्रांसपोर्ट और लोकल बॉडी टैक्स की वजह से पेट्रोल की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं. वहीं, जीएसटी में शामिल होने पर इस पर सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा. 


 

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